जब पत्नी ही बनी पति की कातिल: रिश्तों की हत्या या समाज का सच?
📍 संपादकीय विशेष | मानव कल्याण संस्थान न्यूज़ डेस्क
🗓️ 12 जून 2025
🔴 सिद्धार्थनगर से मेघालय तक, रिश्तों पर पड़ रहा मौत का साया
पति-पत्नी का रिश्ता… भारतीय संस्कृति में जिसे सात जन्मों का बंधन कहा गया है, वही रिश्ता आज साजिश, धोखा और हत्या के साए में दम तोड़ता नज़र आ रहा है।
जहाँ कभी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार होती थीं, अब समाज का दूसरा पहलू सामने आ रहा है — पतियों की हत्या उनकी पत्नियों द्वारा।
🛑 ताज़ा उदाहरण: सिद्धार्थनगर की ‘संगीता हत्याकांड’
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से आई एक दिल दहला देने वाली खबर में, एक महिला संगीता ने अपने पति कन्नन को पहले मंदिर ले जाकर प्रसाद में ज़हर दिया, फिर बेहोश होने पर प्रेमी अनिल शुक्ला के साथ मिलकर नदी में धक्का दे दिया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि संगीता और अनिल पिछले 5 वर्षों से अवैध संबंधों में थे, और पति के विरोध करने पर उन्होंने मिलकर यह खौफनाक साजिश रची।
🕵️♀️ मेघालय हनीमून मर्डर केस: प्यार, शादी और साजिश
इंदौर की सोनम रघुवंशी ने अपने पति राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून ट्रिप के दौरान हत्या कर दी। पुलिस ने जब तहकीकात की, तो सामने आया कि सोनम का पहले से किसी और के साथ रिश्ता था, और पति इस सच से अनजान था।
इस केस में भी साजिश पहले से तैयार थी, शादी सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गई थी।
❓ आख़िर क्या हो गया है हमारे समाज को?
क्या रिश्तों की गरिमा खत्म हो रही है?
क्या स्वार्थ, लालच और आकर्षण ने भरोसे की जगह ले ली है?
क्या विवाह अब सिर्फ कानूनी समझौता बनकर रह गया है?
एक समय था जब पति-पत्नी के झगड़े रूठने-मनाने तक सीमित होते थे, आज वो हत्या और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच रहे हैं।
📉 रिश्तों के टूटने के 5 मुख्य कारण
1. 🔇 संवाद की कमी
जब बात नहीं होती, तो शक पनपता है — और शक, प्यार का दुश्मन होता है।
2. 📲 सोशल मीडिया का ज़हर
आसान “कनेक्शन” ने असली रिश्तों को कमजोर बना दिया।
3. 🤥 झूठ और छुपाव
पहले से अफेयर छिपाकर शादी करना या शादी के बाद धोखा देना।
4. 🙅♀️ धैर्य और सहनशीलता की कमी
“तुरंत परिणाम” चाहने वाली सोच ने समझौते को बेकार बना दिया।
5. ⚖️ कानूनी दुरुपयोग और असंतुलन
अब दोनों पक्षों में “कानून का डर” नहीं, बल्कि “कानून का हथियार” बनता जा रहा है।
💡 रिश्ते बचाने के 5 उपाय — समाज के लिए सीख
✅ 1. ईमानदारी से रिश्ता निभाएं
कोई भी रिश्ता झूठ और धोखे पर नहीं टिकता।
✅ 2. संवाद करें, फैसला नहीं सुनाएं
छोटी-छोटी बातें भी अगर दिल में रखें, तो बड़ा जहर बन सकती हैं।
✅ 3. पारिवारिक मूल्यों की वापसी हो
माता-पिता और बड़ों से रिश्तों की शिक्षा लें, न कि टीवी सीरियल से।
✅ 4. जरूरत हो तो काउंसलिंग लें
मनोवैज्ञानिक या सामाजिक परामर्श रिश्तों को टूटने से बचा सकता है।
✅ 5. सही जीवनसाथी का चयन
सिर्फ सुंदरता, पैसा या समाजिक दबाव से शादी न करें — सोच, संस्कार और समझ सबसे जरूरी हैं।
✨ क्या कहता है Manav Kalyan Sansthan?
मानव कल्याण संस्थान का मानना है कि समाज में रिश्तों की गिरावट किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरा सामाजिक ताना-बाना कमजोर पड़ने का संकेत है।
हमने रिश्ता जोड़ो अभियान शुरू किया है, जिसमें:
दंपतियों के लिए काउंसलिंग कैंप
युवा वर्ग के लिए रिश्तों पर जागरूकता सेमिनार
डिजिटल कैंपेन: “रिश्ता सिर्फ नाम नहीं, जिम्मेदारी है”
📢 अंतिम सवाल – क्या वाकई हम अब भी रिश्ते निभा पा रहे हैं?
“अगर रिश्तों में प्रेम न रहा, तो कानून भी रिश्तों को नहीं बचा सकता।”
एक खतरनाक दौर में हम खड़े हैं जहाँ “विवाह” अब सुखद शुरुआत नहीं, बल्कि साज़िश की पृष्ठभूमि बनती जा रही है।
अब समय आ गया है कि हम रिश्तों की मर्यादा और सामाजिक मूल्यों को फिर से मजबूत करें।
📍 समाज सुधार में भाग लें – संपर्क करें:
🌐 www.manavkalyansansthan.org.in
📧 tomanavkalyan@gmail.com
📞 9415859689
📍 Shamshernagar, Dargahiya Kunraghat, Gorakhpur
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपको लगता है कि रिश्तों को बचाया जा सकता है?
अपनी राय कमेंट करें या हमारे अभियान से जुड़ें।
