गोरखपुर। समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध मानव कल्याण संस्थान, गोरखपुर ने एक अनूठी पहल की है। संस्थान ने नृत्य के माध्यम से बच्चियों के कौशल विकास की दिशा में कार्य करते हुए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य न केवल बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति की क्षमता और कला के प्रति रुचि को भी बढ़ावा देना है।
नृत्य बना आत्मनिर्भरता का माध्यम
कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग की बच्चियों ने भाग लिया, जहां उन्हें शास्त्रीय, लोक और समकालीन नृत्य की बारीकियां सिखाई गईं। प्रशिक्षकों ने नृत्य को न केवल एक कला के रूप में बल्कि एक करियर ऑप्शन के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
संस्थान के संस्थापक और महासचिव विपिन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि –
“नृत्य सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह आत्म-अभिव्यक्ति और सशक्तिकरण का भी माध्यम है। हमारी संस्था इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चियों को नए अवसर प्रदान कर रही है।”
समाज और परिवारों का बढ़ा सहयोग
इस पहल से न केवल बच्चियां बल्कि उनके माता-पिता भी उत्साहित हैं। कई अभिभावकों ने माना कि पहले वे नृत्य को केवल एक शौक समझते थे, लेकिन अब वे इसे रोजगार और आत्मनिर्भरता का जरिया मानने लगे हैं।
संस्थान की भविष्य की योजना
मानव कल्याण संस्थान ने आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों को जारी रखने की योजना बनाई है। जल्द ही नृत्य और अन्य कलाओं से जुड़े रोजगारपरक प्रशिक्षण शुरू किए जाएंगे, जिससे बच्चियां अपने हुनर को और निखार सकेंगी।
संस्थान की यह पहल समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बच्चियां किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।