स्कूल फीस ना जमा होने पर अपमानित छात्रा ने की आत्महत्या – शिक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक 9वीं कक्षा की छात्रा ने स्कूल प्रशासन द्वारा अपमानित किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल शिक्षा प्रणाली की क्रूर सच्चाई को उजागर करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं और शिक्षण संस्थानों की संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़े करती है।

घटना का विवरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रा की स्कूल फीस समय पर जमा नहीं हो पाई थी, जिसके कारण स्कूल प्रशासन ने उसे अन्य छात्रों के सामने अपमानित किया और कथित तौर पर प्रताड़ित किया। इस मानसिक प्रताड़ना को सहन न कर पाने के कारण छात्रा ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना समाज के लिए एक गहरी चोट की तरह है, जो हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर शिक्षा का उद्देश्य क्या मात्र व्यवसायिक लाभ कमाना ही रह गया है?

शिक्षा का व्यावसायीकरण – एक गंभीर समस्या

आज के दौर में शिक्षा का व्यवसायीकरण तेजी से बढ़ रहा है। स्कूल और कॉलेज ज्ञान के मंदिर होने के बजाय एक व्यावसायिक केंद्र बनते जा रहे हैं, जहां गरीब और जरूरतमंद छात्रों के लिए कोई स्थान नहीं है। क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसे कमाना रह गया है? क्या गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर देना ही इन संस्थानों का नया नियम बन गया है?

सरकारी योजनाओं की विफलता

सरकार द्वारा शिक्षा के अधिकार (Right to Education – RTE) और विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सहायता प्रदान करना है। लेकिन इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि इन योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर नगण्य है। यदि सरकारी योजनाएं प्रभावी होतीं, तो इस बच्ची की जिंदगी यूं समाप्त न होती।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

इस दुखद घटना से सीख लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को अविलंब इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए। सरकार को:

  1. स्कूल प्रशासन पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को फीस के कारण अपमानित न किया जाए।
  2. सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी करने चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में फीस न भर पाने के कारण छात्रों को प्रताड़ित न किया जाए।
  3. शिक्षा के अधिकार कानून को प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए ताकि कोई भी छात्र आर्थिक समस्या के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
  4. मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए ताकि छात्र तनाव की स्थिति में उचित परामर्श प्राप्त कर सकें।

समाज की भूमिका

समाज को भी इस घटना से सबक लेने की आवश्यकता है। शिक्षा केवल अमीरों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है। हमें जरूरतमंद बच्चों की मदद करने और शिक्षा को एक अधिकार के रूप में स्थापित करने के लिए आगे आना चाहिए।

मानव कल्याण संस्थान, गोरखपुर जनहित में इस संदेश को जारी कर रहा है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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